अनादि कल से ही भारतवर्ष दुनिया का केंद्र रहा है।भारत हजारों सालों का इतिहास अपने में समेटे हुए है। धर्म, शिक्षा, व्यापार, योग स्वास्थय, अर्थशास्त्र, विज्ञान इत्यादि अनेको विषयो में भारत को महारत हासिल थी।
गुलामी की जकड़ की वजह से भारत अपना अस्तित्व अपनी पहचान भूल चुका है। अपनी मूल संस्कृति " सनातन संस्कृति " की परंपराओं को विस्मृत करने का दंड
भारत को इस प्रकार मिला है कि आज भारत को दुबारा अपनी पहचान दुनिया में स्थापित करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। 1000 साल की गुलामी ने भारतवर्ष को पूरी तरह झकझोर दिया है। विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
कुछ समय से भले कुछ संतोष जरूर मिला है कि भारत
अपनी पहचान और स्वाभिमान साबित करने में काफी सफलता भी मिली है। भारत को निरंतर अपने पड़ोसियों खासकर चीन व पाकिस्तान से खतरा भी उठाना पड़ा है।
सबसे बड़ा खतरा जो भारत को वर्तमान में है, वो बाह्य चुनौतियों को छोड़ दे तो आंतरिक राजनैतिक और सामाजिक समस्याओ से है। जैसे कि आपस में राजनैतिक द्वेष, वामपंथी विचारधारा, नक्सली आतंकवाद, अति सहिष्णुता, देशद्रोही विचारधारा, अलगाववाद आदि।
दुसरी तरफ चीन जो कि पूरी दुनिया के लिए एक खतरा बन चुका है, भारत इसमें सबसे पहले नंबर पर है। कही न कही पूरी दुनिया को अब लगने लगा है कि भारत अब अपना खोया हुआ सम्मान पाने की राह में तेजी से बढ़ चला है। भारत का बढ़ता हुआ वर्चस्व कुछ देश पचा नहीं पा रहे है। इस सूची में श्रेणी देशों जैसे कि अमेरिका, चीन,
यूरोप, पाकिस्तान, रूस इत्यादि है। भारत का बढ़ता वर्चस्व इसलिए भी दुनिया को खटकता है क्युकी भारत अपने सनातन रूप में पहचान बना रहा है।
अंत में यह ही निष्कर्ष निकलता है कि अगर भारत को पहले की तरह ही विश्वगुरु बनना है तो एक दृढ़ संकल्प, दृढ़ इच्छाशक्ति से कठोर रणनीति के तहत अपने दुश्मनों का सामना करना होगा। इसमें कुछ कठोर उदाहरण भी पेश करने पड़ सकते है जैसा कि इजरायल ने भी किया है।
भारत को राजनीति से ऊपर उठकर तेजी विकास प्रक्रिया में भाग लेना पड़ेगा। यदि भारत इन सब मापदंडो पर खरा उतरता है तो निश्चित ही भारत विश्वगुरु बनेगा और पूरे मानव जाति का मार्गदर्शन करेगा।
जय हिंद।